स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी, ‘फ्राइडे ड्राई डे’ मनाने और साफ पानी पीने की सलाह; बच्चों-बुजुर्गों पर ज्यादा खतरा, अस्पतालों में 40% तक बढ़े पेट के संक्रमण के मामले
कलमवीर, डेस्क। देश के कई राज्यों में मानसून की दस्तक के साथ ही मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। तापमान में गिरावट, बढ़ी हुई नमी और जलभराव के कारण मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, टाइफाइड, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभागों ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
क्या है खतरा और क्यों बढ़ रहे मामले
भारत मौसम विभाग (IMD) ने अगले सप्ताह तेलंगाना, महाराष्ट्र, मुंबई, पूर्वोत्तर और कई राज्यों में हल्की से भारी बारिश की चेतावनी दी है। डॉक्टरों के मुताबिक बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह है। रुका हुआ पानी एनोफिलीज मच्छर को ब्रीड करने का मौका देता है, जो मलेरिया फैलाता है। मुंबई में इस साल जून में मलेरिया के 884 मामले दर्ज हुए हैं, जो पिछले साल जून के 443 मामलों से लगभग दोगुने हैं। वहीं पानी और खाने के जरिए फैलने वाली बीमारियां जैसे डायरिया, टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस ए भी बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मानसून में पेट के संक्रमण के मामले 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। बच्चों और बुजुर्गों की इम्युनिटी कमजोर होने के कारण उनमें डिहाइड्रेशन और गंभीर लक्षण का खतरा ज्यादा है।
डिहाइड्रेशन: गर्मी-उमस का डबल अटैक
IMD ने विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 40-42 डिग्री तक तापमान और हीट वेव की चेतावनी दी है। ऐसे में बारिश के साथ उमस और गर्मी दोनों से डिहाइड्रेशन का खतरा है। डॉक्टरों के मुताबिक उल्टी-दस्त होने पर शरीर से पानी तेजी से निकलता है और समय पर इलाज न मिले तो स्थिति गंभीर हो सकती है, खासकर बच्चों में। स्वास्थ्य विभाग ने पर्याप्त पानी पीने और सीधे धूप से बचने की सलाह दी है।
क्या है सरकार की तैयारी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने 18 जून को मलेरिया और डेंगू की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। राज्यों से सर्विलांस मजबूत करने, दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और वेक्टर कंट्रोल तेज करने को कहा गया है। राजस्थान में 1 अप्रैल से 15 मई तक 25,000 टीमों ने डोर-टू-डोर अभियान चलाया और इस साल पहले तीन महीनों में 163 डेंगू, 35 मलेरिया और 20 चिकनगुनिया के केस मिले हैं।
कैसे बचें: डॉक्टरों की 7 अहम सलाह
मच्छरों से बचाव: दरवाजे-खिड़कियों पर जाली लगाएं, मच्छरदानी का इस्तेमाल करें और मॉस्किटो रिपेलेंट लगाएं। सुबह-शाम पूरे बाजू के कपड़े पहनें। पानी जमा न होने दें: कूलर, गमले, टायर, ड्रम में पानी जमा न होने दें। हर शुक्रवार ‘ड्राई डे’ मनाकर घर के आसपास सफाई करें। साफ पानी पिएं: सिर्फ उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं। बाहर का बासी खाना और कटे फल खाने से बचें। हाथ धोना न भूलें: खाने से पहले और टॉयलेट के बाद साबुन से हाथ धोएं। खांसते-छींकते समय मुंह ढकें। स्ट्रीट फूड से परहेज: मानसून में सड़क किनारे मिलने वाला खाना, गोलगप्पे, चाट से गैस्ट्रोएंटेराइटिस, टाइफाइड और हेपेटाइटिस का खतरा रहता है। लक्षण दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं: लगातार उल्टी, दस्त, बुखार, पेट दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। डिहाइड्रेशन जानलेवा हो सकता है। बच्चे-बुजुर्गों का खास ख्याल: इनकी इम्युनिटी कमजोर होती है, इसलिए घर का बना ताजा खाना दें और थोड़ी सी दिक्कत पर भी डॉक्टर से सलाह लें।
मलेरिया के लक्षण पहचानें
तेज बुखार के साथ कंपकंपी, पसीना, सिरदर्द, उल्टी और बदन दर्द मलेरिया के शुरुआती लक्षण हैं। इलाज में देरी से एनीमिया, सांस की तकलीफ और सेरेब्रल मलेरिया हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश भले राहत दे, लेकिन बीमारियों को न्योता भी देती है। इसलिए सावधानी ही बचाव है। अगर लक्षण दिखें तो सेल्फ मेडिकेशन न करें और तुरंत सरकारी अस्पताल या नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
