ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति की पीड़ा दूर करने के लिए भी लाभकारी, 6, 8 और 12वें भाव में गुरु होने पर करने की है सलाह
कलमवीर, मथुरा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विशेष पर्व और तिथियों पर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। एकादशी, अनंत चतुर्दशी, देवशयनी, देव उठनी, दिवाली, खरमास, पुरुषोत्तम मास और तीर्थ क्षेत्रों में इस स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि विशेष अवसरों पर व्रत के साथ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में धन-धान्य और सुख-संपदा का वास बना रहता है। परिवार में समृद्धि आती है और आर्थिक तंगी दूर होती है। संतान पक्ष से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए भी इस पाठ को प्रभावशाली माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार नियमित पाठ से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विष्णु सहस्रनाम का पाठ बृहस्पति ग्रह की पीड़ा को शांत करने में भी सहायक है। जिन जातकों की कुंडली में गुरु छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है, उन्हें विशेष रूप से इस स्तोत्र का पाठ करने की सलाह दी जाती है। कहा जाता है कि इससे गुरु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
विद्वानों का कहना है कि विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने के कुछ नियम भी हैं। शुद्ध मन और पवित्र तन से इसका पाठ करना चाहिए। विशेष तिथियों और पर्वों पर किए गए पाठ का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए श्रद्धालु एकादशी से लेकर खरमास तक के समय को इस पाठ के लिए सबसे उत्तम मानते हैं।
