बीजेपी क्यों नहीं चुन पा रही नेता प्रतिपक्ष? सर्वदलीय बैठक से भी बनाई दूरी

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झारखंड विधानसभा 2024 के चुनाव परिणाम के बाद भारतीय जनता पार्टी अब तक अपना नेता नहीं चुन पाई है. आगामी 24 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से बुलाए गए सर्वदलीय बैठक से भी बीजेपी ने दूरी बनाई. इसके बाद झारखंड में सियासत एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष को लेकर गर्म हो गई. क्या असमंजस में है बीजेपी? आखिर विधायक दल का नेता चुनने में क्या आ रही है परेशानी? बिना प्रतिपक्ष नेता के होगा बजट सत्र? विधायक दल नेता नहीं चुन पाना क्या भारतीय जनता पार्टी की रणनीति का हिस्सा है? या फिर बीजेपी नेता चुनने को लेकर असमंजस में है. अब बीजेपी के इस असमंजस पर विपक्ष हमलावर है.

जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष में नेता दिया, लेकिन कोई भी जन प्रतिनिधि नहीं पहुंचा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है. सीपी सिंह सबसे अनुभवी और वफादार नेता बीजेपी के रहे हैं. बीजेपी ने ना कोई नेता प्रतिपक्ष बनाए और ना कोई मुख्य सचेतक बनाया, लेकिन किसी को भी पार्टी में बैठक में नहीं भेजा. यह इनका आपसी सिरफुटवल है.

वहीं, इस पर कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा कि इस राज्य से विपरीत जनादेश पूरे बीजेपी को बेचैन कर दिया है. बीजेपी आयातित नेताओं से अपने विधायकों की संख्या बढ़ा रही है तो स्वाभाविक है कि विधायक दल का नेता चुनने में परेशानी हो रही है. सभी आयातित नेता इसी सोच के साथ बीजेपी में गए थे कि हम मुख्यमंत्री या मंत्री बनेंगे, लेकिन जनता ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया. हमें लगता है कि बीजेपी में अभी भी टूट का खतरा मंडरा रहा है. आज तिथि यह है कि यह लोग नेता प्रतिपक्ष नहीं चुन पा रहे हैं तो अब साफ है कि बीजेपी कभी भी खंड-खंड में विभाजित हो सकता है.

बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शहदेव ने कहा कि एक सिस्टम होता है और स्पीकर को पार्टी को न्योता भेजना चाहिए था. जहां तक नेता प्रतिपक्ष की बात है तो हम बहुत जल्द इसका चुनाव कर लेंगे. मगर, जहां तक सरकार सूचना आयुक्त और लोकायुक्त की नियुक्ति की बात करती है तो पिछले सवा साल तक हमारे बावरी नेता प्रतिपक्ष थे, लेकिन इन्होंने कभी भी नियुक्ति की बात नहीं की. उन्होंने कहा कि नहीं मैंने कहा कि जिन लोगों ने ढाई लाख करोड़ के योजनाओं की घोषणा की है, वह फस चुके हैं. सरकार को उन चीजों पर ध्यान देना चाहिए जिन मुद्दों से जीतकर वह आए है.

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