जबलपुर। मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्रस्तावित विखंडन के विरोध में बुधवार को कांग्रेस पदाधिकारियों ने संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। संभागीय उपायुक्त दिव्या अवस्थी को सौंपे गए ज्ञापन में विश्वविद्यालय का मुख्यालय जबलपुर में यथावत बनाए रखने और विखंडन संबंधी प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं ने इसे जबलपुर की ऐतिहासिक उपलब्धि और महाकौशल की शैक्षणिक अस्मिता से जुड़ा विषय बताते हुए सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।ज्ञापन में कहा गया कि मेडिकल साइंस विश्वविद्यालय की परिकल्पना वर्ष 2003 में की गई थी और वर्ष 2011 में इसकी स्थापना हुई। बीते लगभग डेढ़ दशक में विश्वविद्यालय ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। वर्तमान में इसके अधीन प्रदेश के 100 से अधिक मेडिकल एवं संबद्ध महाविद्यालय संचालित हैं, जिनमें हजारों विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और सैकड़ों शिक्षक एवं कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे संस्थान का विभाजन शिक्षा व्यवस्था के लिए हितकारी नहीं होगा।
कांग्रेस पदाधिकारियों का कहना था कि यदि शासन को विश्वविद्यालय के संचालन में किसी प्रकार की प्रशासनिक कठिनाई महसूस हो रही है तो उसका समाधान प्रशासनिक संसाधनों को मजबूत कर किया जाना चाहिए, न कि विश्वविद्यालय का विखंडन करके। उनका तर्क था कि विश्वविद्यालय का विभाजन चिकित्सा शिक्षा को बेहतर बनाने के बजाय नई प्रशासनिक जटिलताएं उत्पन्न करेगा और जबलपुर की वर्षों से स्थापित शैक्षणिक पहचान को भी कमजोर करेगा।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि मेडिकल साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना जबलपुर के लिए एक बड़ी उपलब्धि रही है, जिसे किसी भी परिस्थिति में कमतर नहीं किया जाना चाहिए। प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा और विद्यार्थियों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय का वर्तमान स्वरूप एवं मुख्यालय यथावत रखा जाए तथा विखंडन संबंधी प्रस्ताव तत्काल वापस लिया जाए।
इस अवसर पर रिजवान अली कोटी, बादल पंजवानी, कपिल भोजक, अमित सोनकर, सागर शुक्ला, रिंकू बदलानी, आयुष पहारिया, शफी खान, जफर खान, अनुराग शुक्ला, एजाज अंसारी, अदील सैय्यद, वकार खान, युग ठाकुर सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी उपस्थित रहे।
