आर्कटिक से स्पेन तक दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण, आइसलैंड में 1954 और स्पेन में 1905 के बाद पहला मौका | उसी रात पर्सिड्स उल्का वर्षा भी चरम पर
कलमवीर, डेस्क। खगोल प्रेमियों के लिए अगस्त का महीना बेहद खास होने जा रहा है। 12 अगस्त 2026 को एक दुर्लभ पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा, जब दिन में कुछ देर के लिए रात जैसा अंधेरा छा जाएगा। चंद्रमा की मुख्य छाया आर्कटिक, पूर्वी ग्रीनलैंड, पश्चिमी आइसलैंड, अटलांटिक महासागर और उत्तरी स्पेन के ऊपर से गुजरेगी। इन इलाकों में लोग सूरज के कोरोना यानी बाहरी घेरे का अद्भुत नजारा देख सकेंगे।
भारत पूर्ण ग्रहण के मुख्य रास्ते में नहीं आता है, लेकिन देश के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा। पूर्ण ग्रहण के दौरान दिन की रोशनी अचानक बेहद कम हो जाएगी और आसमान में नॉर्दर्न लाइट्स के साथ टूटते तारे भी दिखने की संभावना है।
इस सूर्य ग्रहण की सबसे बड़ी खासियत इसकी अवधि है। पूर्ण ग्रहण 2 मिनट 18 सेकंड तक रहेगा और सबसे लंबा नजारा आइसलैंड के पास दिखाई देगा। स्पेन में यह अद्भुत खगोलीय घटना सूर्यास्त से ठीक पहले घटित होगी, जबकि ग्रीनलैंड में भी इसे साफ तौर पर देखा जा सकेगा।
यह ग्रहण ऐतिहासिक भी है क्योंकि साल 1954 के बाद पहली बार आइसलैंड से और 1905 के बाद पहली बार स्पेन से पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। मुख्य यूरोप में 1999 के बाद से कोई पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं देखा गया है। यूरोप के ज्यादातर हिस्सों, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका, कनाडा और उत्तरी अमेरिका के कुछ भागों में लोग आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा ले सकेंगे।
12 अगस्त की रात खगोल विज्ञान के लिहाज से डबल धमाका लेकर आएगी, क्योंकि इसी दिन सालाना पर्सिड्स उल्का वर्षा भी अपने चरम पर होगी। इस दौरान आसमान में प्रति घंटे 100 तक टूटते तारे देखे जा सकते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है और सूर्य की चमकदार डिस्क को पूरी तरह ढक लेता है। ऐसा इसलिए संभव हो पाता है क्योंकि सूर्य चंद्रमा से 400 गुना बड़ा है, लेकिन वह 400 गुना दूर भी है। इस वजह से दोनों आसमान में एक ही आकार के दिखाई देते हैं।
