जबलपुर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार को आनंद धाम की ओर से मानस भवन में परमपूज्य सद्गुरु श्री रितेश्वर जी महाराज के दिव्य सानिध्य में गुरु पूर्णिमा महा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में संतजन एवं श्रद्धालु शामिल हुए।
मानस भवन में आयोजित कार्यक्रम में परमपूज्य सद्गुरु ने संस्कारधानी वासियों को संबोधित करते हुए कहा कि हाथों में जल लेकर आचमन करना जितना आवश्यक है उससे ज्यादा आंखों में जल लेकर गुरु के चरणों में बैठना जरूरी है, आज युवाओं के हाथों में मोबाइल है जो उन्हें दुनिया भर का ज्ञान देता है लेकिन सिर्फ गुरु ही आत्मज्ञान देते हैं जो विज्ञान और आत्मज्ञान को समझ गया, वह आधुनिक संस्कृति और प्राचीन परंपराओं के साथ सफल होता है।
आज की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बढ़ रहा है, जबकि इनर इंटेलिजेंस यानी आत्मज्ञान घट रहा है यदि आज का युवा AI का सही उपयोग करे तो वह कदम कदम पर फूल खिला सकता है, जीवन सुगंधित हो सकता है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु को फूलों के साथ अहम् का भी समर्पण करें, यही गुरु पूर्णिमा का सार्थक उद्देश्य है।
सदगुरु ने कहा कि दुनिया में चीन जापान, रशिया, विज्ञान और तकनीक में सबसे आगे हैं लेकिन भारत में आज भी ट्रेनों में मग को जंजीर से बांधकर रखना पड़ता है… केवल प्रवचनों से भारत विश्व गुरु नहीं बन सकता इसके लिए हमें अंदर से आत्मज्ञानी भी बनना होगा, अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी समझना होगा। शास्त्र कहते हैं नाना- मुनि, नाना – मत…. सदगुरु ने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्री राम के दो गुरु थे कुलगुरु वशिष्ठ और शास्त्र गुरु विश्वामित्र और दोनों विरोधी थे… फिर एक समय आया जब दोनों गुरुओं का मिलन हुआ… और श्रीराम को उनका मार्गदर्शन भी एक साथ मिला जिसके कारण वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल हुए । इसी तरह हमारे यहां भी मतभेद है यदि मत के भेद को मिटा दिया जाए तो सभी में समानता आ जाएगी।
सद्गुरु ने आज के Gen Z को संबोधित करते हुए कहा कि एक वक्त था जब हम भी युवा थे और हम उस समय के Gen Z थे। तब हम भी अपने बुजुर्गों की बात नहीं मानते थे। उनके विचार और हमारे विचारों में भी अंतर होता था, आज के युवाओं के विचार भी हमारे साथ मेल नहीं खाते लेकिन यह हमारे विरोधी नहीं हैं। इन्हें समझने की जरूरत है युवाओं को संबोधित करते हुए सद्गुरु ने कहा कि साधन तो सरकार दे सकती है लेकिन साधनों का सही उपयोग करने की साधना केवल गुरु दे सकते हैं। गुरुदेव ने जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को लेकर भी कहा कि भीड़ कभी सत्य का प्रमाण नहीं हो सकती। लोगों के बीच एक जुटता के लिए प्रेम और वैचारिक समन्वय होना आवश्यक है। आज हम अपने परिवारों के साथ कितना बैठ पाते हैं, एक वक्त था जब हमारे दादा परदादा के जीवन में डिप्रेशन शब्द नहीं था क्योंकि वह सभी के साथ जुड़कर रहते थे और आज के दौर में हर व्यक्ति डिप्रेशन में है क्योंकि वह लोगों के साथ तो रहता है लेकिन ना तो परिवार से जुड़ा होता है और ना ही समाज से… उसका अकेलापन ही उसे डिप्रेशन में ले जा रहा है।
आज की युवा पीढ़ी में बच्चों को संस्कार देना बहुत जरूरी हो गया है हर बच्चा 8 साल की उम्र तक संस्कार सीख लेता है, उस समय उन्हें जो सिखाया जाता है वह जीवन भर उसके अनुसार व्यवहार करता है। सनातन संस्कृति में 16 संस्कार हैं लेकिन ज्यादातर लोगों को इन संस्कारों के नाम भी नहीं मालूम। जब हमें खुद अपने संस्कारों की जानकारी नहीं है तो युवाओं को संस्कार कैसे सिखाएंगे। राम मंदिर की चोरी तो सरकार और अधिकारी ठीक कर देंगे लेकिन संस्कारों की चोरी कैसे ठीक होगी।
सदगुरु ने वर्तमान परिस्थितियों में विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर युवाओं को सतर्क रहने की सलाह दी है इसके साथ ही उन्हें तकनीक और अध्यात्म के बीच समन्वय बनाकर जीवन के मार्ग पर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।
समारोह में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह ‘अन्नू’, विधायक इंदु तिवारी, विधायक अभिलाष पांडे, विधायक अशोक रोहाणी, नगर निगम अध्यक्ष रिंकू विज, जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष संदीप जैन तथा दिव्यांग प्रकोष्ठ अध्यक्ष पंकज दुबे सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
गुरु पूर्णिमा पर्व पर आयोजित इस कार्यक्रम में आनंदम धाम परिवार जबलपुर कार्यक्रम संयोजक रजनेश दुबे, विवेक सिंह, रमेश श्रीवास काका, कपिल दुबे, पंकज राजपूत, धरम गौतम, पवन पटेल, नितिन ग्रोवर समेत सभी आयोजन कर्ता उपस्थित रह।
