जबलपुर . गोहलपुर क्षेत्र में एक मध्यमवर्गीय परिवार इन दिनों बेहद मुश्किल हालात से गुजर रहा है। बरसात का मौसम शुरू हो चुका है, लेकिन परिवार का मकान आधा-अधूरा और खुला हुआ है। छोटे-छोटे मासूम बच्चे इस असुरक्षित घर में रहने को विवश हैं, जबकि निर्माण कार्य विवाद के कारण रुका पड़ा है। परिवार ने प्रशासन और विधायक से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
क्या है मामला-प्रार्थी मोहम्मद वसीम पुत्र शब्दीर निवासी चार खम्मा, गोहलपुर ने अपनी मां नाजिरा बेगम के माध्यम से वर्ष 2008 (23 जून 2008) में श्रीमती बानो बी से यह प्लॉट/मकान 70,000 रुपये में खरीदा था। यह खरीदारी आपसी सहमति से नोटरीकृत इकरारनामे के तहत हुई थी। पिछले 18 वर्षों से परिवार का इस संपत्ति पर कब्जा है। यह आबादी भूमि है, इसलिए परिवार का कब्जा उसका वास्तविक अधिकार माना जाता है।
विवाद की जड़ क्या है-खरीदारी के समय दस्तावेज में केवल कमरे के अंदर की दीवारों का ही उल्लेख किया गया था, जबकि मोटी बाहरी दीवारों को छोड़ दिया गया था। अब जब पुरानी दीवारें टूट गईं और परिवार ने उसी पुराने कब्जे वाली जगह पर पुनर्निर्माण शुरू किया, तो दीवारों के साथ वह पुराना सीमा विवाद भी साफ हो गया। परिवार का दावा है कि वह एक इंच भी अतिरिक्त जगह पर निर्माण नहीं कर रहा है।
गंभीर आरोप:-पीड़ित परिवार ने शिकायत में गंभीर आरोप लगाए हैं-
· विपक्षी पक्ष ने निर्माण कार्य जबरन रुकवा दिया।
· काम शुरू करने के एवज में बड़ी आर्थिक रकम (एक्सटॉर्शन) की मांग की जा रही है।
· पैसे न देने पर रोजाना गाली-गलौज, विवाद और जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
· क्षेत्र की शांति भंग की जा रही है और परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।प्रार्थी का कहना है कि वह मध्यमवर्गीय है और इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ है। उसने इस मामले में क्षेत्रीय विधायक को भी शिकायत दी है, जिसकी प्रति आवेदन के साथ संलग्न है।
प्रशासन से गुहार:परिवार ने प्रशासन से निवेदन किया है-
1. बरसात, बच्चों की सुरक्षा और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल मौके का मुआयना कराया जाए।
2. निर्माण कार्य शांतिपूर्वक पूरा करने के लिए पुलिस संरक्षण प्रदान किया जाए।
3. एक्सटॉर्शन और प्रताड़ना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
परिवार ने अपने आवेदन के साथ नोटरीकृत इकरारनामे की प्रति, टैक्स नक्शा और विधायक को दी गई शिकायत की प्रति संलग्न की है। फिलहाल परिवार की नजरें प्रशासन की ओर हैं, क्योंकि बारिश के इस मौसम में उनके छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है।
