सृजन शुक्ला ,जबलपुर।मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी इन दिनों दिल्ली में हुए संसद मार्च के दौरान घायल होने के बाद चर्चा में हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के अनुसार, इरशाद 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान घायल हुए थे और उनका इलाज दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है। उनके शरीर, चेहरे और गर्दन पर कई छर्रेनुमा (पैलेट जैसी) चोटें बताई गई हैं तथा उनकी तीन घंटे तक सर्जरी भी हुई है।
बताया जा रहा है कि इरशाद मूल रूप से जबलपुर के रहने वाले हैं और रोजगार के सिलसिले में दिल्ली में रहते हैं। उनके परिचितों का दावा है कि डॉक्टरों ने शरीर से कई पैलेट निकाले हैं, जबकि गर्दन में फंसा एक पैलेट रक्तवाहिका के बेहद करीब होने के कारण नहीं निकाला जा सका। कुछ रिपोर्टों में उनकी आंख को भी गंभीर नुकसान की आशंका जताई गई है। �
हालांकि, इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस ने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा है कि दिल्ली पुलिस के पास न तो पैलेट गन हैं और न ही संसद मार्च के दौरान उनका उपयोग किया गया। पुलिस ने पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने संबंधी दावों को भ्रामक और अपुष्ट बताया है तथा लोगों से अप्रमाणित जानकारी साझा नहीं करने की अपील की है।
उधर, कुछ मीडिया संस्थानों ने अस्पताल सूत्रों और इरशाद के साथियों के हवाले से उनके शरीर पर पैलेट जैसी चोटों का दावा प्रकाशित किया है। वहीं पुलिस का कहना है कि चोटों के कारणों की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक चिकित्सकीय दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में चोटों की वास्तविक वजह को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
जबलपुर से जुड़े इस मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज कर दी है। फिलहाल इरशाद का उपचार दिल्ली में जारी है और घटना की परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। आधिकारिक जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
