गोरखपुर मारपीट मामला- सामने आया पुलिस का पक्ष थाना प्रभारी बोले थाने से सुरक्षित चलकर गया था अवैध शराब कारोबारी, आरोपी को बताया निराधार

Srajan Shukla
Srajan Shukla 106 Views
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जबलपुर, कलमवीर संघर्ष संगठन । गोरखपुर थाना क्षेत्र में कथित तौर पर पुलिस द्वारा एक व्यक्ति के साथ मारपीट किए जाने के सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे आरोपों पर पुलिस ने अपना कड़ा पक्ष सार्वजनिक किया है। पुलिस का कहना है कि जिस व्यक्ति के साथ मारपीट के आरोप लगाए जा रहे हैं, वह कोई पीड़ित या घायल नहीं बल्कि खुद एक आदतन अपराधी है। आरोपी की पहचान सतीश सोनकर (पिता अर्जुन सोनकर) के रूप में हुई है, जिसके खिलाफ पूर्व से ही विभिन्न मामलों में गंभीर अपराध दर्ज हैं और कई मामलों में न्यायालय में चालान (आरोप-पत्र) भी पेश किया जा चुका है.

​पेट्रोलिंग के दौरान अवैध शराब के साथ हुई गिरफ्तारी
​पुलिस अधिकारियों द्वारा जारी बयान (बाइट) के अनुसार, यह पूरा मामला 5 जुलाई (रविवार) का है। गोरखपुर थाना क्षेत्र के महर्षि स्कूल के सामने पेट्रोलिंग टीम को सूचना मिली थी कि सतीश सोनकर नामक व्यक्ति भारी मात्रा में शराब लेकर खड़ा है। पुलिस ने तत्काल मौके पर दबिश दी और आरोपी के कब्जे से 21 पाव मूनलाइट/देशी शराब बरामद की। शराब को विधिवत जब्त करते हुए आरोपी को थाने लाया गया और उसके खिलाफ म.प्र. आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।

​मारपीट के आरोप झूठे; सही सलामत थाने से गया था बाहर
​थाना प्रभारी और पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ दर्ज धारा जमानती और नोटिस के दायरे में आने वाली थी, इसलिए वैधानिक कार्रवाई और कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे थाने से रिहा कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ या कार्रवाई के दौरान उसके साथ किसी भी तरह की मारपीट नहीं की गई। वह अपने पैरों पर चलकर बिल्कुल सुरक्षित और सही-सलामत थाने से बाहर गया था, जिसके समर्थन में पुलिस ने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और तस्वीरें भी जारी की हैं।

​थाने से छूटने के कुछ देर बाद वह वापस आया और मारपीट के झूठे आरोप लगाने लगा। पुलिस ने निष्पक्षता बरतते हुए उसका मुलाहजा (मेडिकल परीक्षण) भी कराया, जिसकी रिपोर्ट में मारपीट या चोट की पुष्टि जैसा कुछ भी सामने नहीं आया है।
​वर्ष 2006 से लेकर 2026 तक का पुलिस रिकॉर्ड आया सामने

​पुलिस ने आरोपी सतीश सोनकर के दावों की हवा निकालने के लिए ICJS (Interoperable Criminal Justice System) और थाना गोरखपुर के चरित्र प्रमाण-पत्र/पुलिस रिकॉर्ड सत्यापन के आधिकारिक दस्तावेज़ जारी किए हैं। इन रिकॉर्ड्स के मुताबिक, आरोपी पिछले दो दशकों से लगातार आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा है। इसके अलावा पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पूर्व में प्रतिबंधात्मक धाराओं (जैसे 34-ए, 34-दो की अन्य लघु धाराएं) के तहत भी कई बार बाउंडओवर और प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयां की जा चुकी हैं।
​जांच के बाद होगी वैधानिक कार्रवाई

  • ​गोरखपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो भी भ्रामक खबरें या वीडियो वायरल हो रहे हैं, उनकी विभागीय स्तर पर गहन जांच की जा रही है। जांच में जो भी वास्तविक तथ्य और सबूत सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन किसी भी आदतन अपराधी को कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने या पुलिस की छवि धूमिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
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