सृजन शुक्ला, जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मंडल में सामने आए करोड़ों रुपये के कथित मेडिकल क्लेम घोटाले में अब नया मोड़ आ गया है। तीन कर्मचारियों के निलंबन के बाद अब तीसरे निलंबित कर्मचारी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह भावुक होकर खुद को निर्दोष बताते हुए रोता नजर आ रहा है। वीडियो में कर्मचारी का दावा है कि उसे बड़े अधिकारियों ने फंसा दिया और वह पूरे मामले में सिर्फ “बली का बकरा” बना है।
वीडियो में कर्मचारी कहता है कि उसने किसी प्रकार का घोटाला नहीं किया, बल्कि पूरे खेल के पीछे बड़े अधिकारी और सिस्टम से जुड़े लोग हैं। उसका कहना है कि कर्मचारी होने की सजा उसे मिली है, जबकि असली जिम्मेदार अब भी कार्रवाई से बाहर हैं।
इस बीच मामले को लेकर नई जानकारी भी सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, मयंक श्रीवास्तव और अतुल जोहरे की यूजर आईडी का उपयोग कर कर्मचारियों के भुगतान में कथित फर्जी मेडिकल बिल लगाए जाते थे। इसके बाद लेखा विभाग से जुड़े कर्मचारी रमेश्वर की आईडी से उन बिलों का वेरिफिकेशन किए जाने का भी आरोप लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में रमेश्वर का वीडियो भी सामने आया है, जिसकी जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में प्रकाशित खबरों के अनुसार अब तक जांच में 19 संदिग्ध मेडिकल क्लेम सामने आए हैं, जिनमें 40 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। तीन कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सूत्रों का दावा है कि पूरे मामले में कई अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज हो सकती है।
हालांकि, मयंक श्रीवास्तव, अतुल जोहरे और रमेश्वर के संबंध में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। रेलवे की विजिलेंस और संबंधित विभाग मामले की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही किसी की जिम्मेदारी या दोष तय होगा।
