डायबिटीज के इलाज में नई उम्मीद: भोपाल में डॉ. आशीष एस. डेंगरा ने बताई ‘इमेग्लिमिन’ दवा की खासियत

Kalamveer News Network
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कलमवीर, जबलपुर। Association of Physicians of India यानी API के भोपाल चैप्टर की तीसरी वार्षिक वैज्ञानिक कॉन्फ्रेंस में डायबिटीज के नए उपचार को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया। शहर के वरिष्ठ डायबिटीज, थायराइड एवं मोटापा रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष एस. डेंगरा ने डायबिटीज की आधुनिक दवा इमेग्लिमिन पर विस्तृत वैज्ञानिक व्याख्यान दिया और बताया कि यह दवा अब मरीजों के लिए गेम चेंजर साबित हो रही है।

डॉ. डेंगरा ने अपने संबोधन में कहा कि इमेग्लिमिन एक ऐड ऑन एंटी डायबिटिक दवा है जो सीधे माइटोकॉन्ड्रियल स्तर पर काम करती है। पारंपरिक दवाएं जहां केवल ब्लड शुगर घटाने पर फोकस करती हैं, वहीं इमेग्लिमिन डायबिटीज के मूल कारणों पर असर डालती है। यह दवा अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं के डिस्फंक्शन को सुधारती है जिससे शरीर में प्राकृतिक इंसुलिन बनने की क्षमता बढ़ती है। साथ ही यह इंसुलिन रेजिस्टेंस को भी कम करती है जो टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों की सबसे बड़ी समस्या है।

उन्होंने बताया कि क्लिनिकल अनुभव में इमेग्लिमिन अन्य एंटी डायबिटिक दवाओं जैसे मेटफॉर्मिन, DPP4 इनहिबिटर और SGLT2 इनहिबिटर के साथ सुरक्षित रूप से दी जा सकती है। इससे मरीजों का तीन माह का औसत शुगर स्तर यानी HbA1c बेहतर तरीके से नियंत्रित हो रहा है। दवा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह एक साथ इंसुलिन स्राव बढ़ाने और इंसुलिन की संवेदनशीलता सुधारने का दोहरा काम करती है।

कॉन्फ्रेंस में मौजूद देशभर से आए फिजिशियन और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट ने डॉ. डेंगरा के व्याख्यान को बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया। उनके वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण के लिए आयोजकों ने उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कई विशेषज्ञों ने कहा कि इमेग्लिमिन जैसी दवाएं भारत में बढ़ते डायबिटीज के बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

डॉ. डेंगरा ने इस मौके पर कहा कि अब डायबिटीज के एडवांस और रिसर्च आधारित इलाज के लिए मरीजों को महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। जबलपुर स्थित माही डायबिटीज, थायराइड केयर एंड रिसर्च सेंटर में इमेग्लिमिन सहित सभी नवीनतम उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। इससे मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों के मरीजों को अपने ही शहर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा सुविधा मिल रही है।

गौरतलब है कि भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और मप्र भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे में इमेग्लिमिन जैसी टार्गेटेड थेरेपी मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।

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