जेल से जमानत पर छूटते ही अपराधी वारदातें कर मचा रहे खौफ का तांडव,दहशत के साए में पीडि़त, गवाह, मिल रही धमकी, केस वापस लेने दबाव

Srajan Shukla
Srajan Shukla 232 Views
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कलमवीर, जबलपुर। शहर में जेल से जमानत पर छूटे बदमाशों ने खौफ का तांडव फैला आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। गंभीर अपराधों में सलाखों के पीछे जाने वाले ये शातिर अपराधी कानूनी दांव-पेंच के सहारे जल्द ही बाहर आ रहे हैं और जेल की दहलीज लांघते ही ये बदमाश शहर में अपनी दहशत और रसूख  कायम करने के लिए सरेआम उत्पात मचा रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि  अपराधी जेल से छूटने के बाद न केवल पुन: वारदातों को अंजाम दे रहे है बल्कि  जमानत पर बाहर आते ही सबसे पहला निशाना वे पीडि़त और गवाह बनते हैं, जिनकी वजह से ये जेल गए थे। आरोपी सरेआम पीडि़तों  डरा-धमका रहे हैं। कोर्ट से केस वापस न लेने पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। इस वजह से कई पीडि़त खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं ।

मॉनिटरिंग लचर, मौका पाते ही वारदात- जेल से रिहा होने वाले अपराधियों की जैसी सख्त  मॉनिटरिंग होनी चाहिए, वैसी धरातल पर नहीं हो पाती। थानों में स्टाफ की कमी, तकनीकी कमियों के कारण इन हिस्ट्रीशीटरों की हरकतों पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है। इसी कमजोर कड़ी का फायदा उठाकर ये अपराधी मौका पाते ही नई वारदातों को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं।

रासुका-तड़ीपार कार्रवाई भी बेअसर-ऐसे आदतन अपराधियों पर नकेल कसने के लिए लगातार प्रतिबंधात्मक धाराएं लगाई जाती है । बड़े बदमाशों के खिलाफ जिला बदर (तड़ीपार) और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) जैसी कड़ी कार्रवाई भी होती है लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इन अपराधियों में कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। जेल से बाहर आते ही इनका पुराना ढर्रा फिर शुरू हो जाता है।

बनानी होगी ठोस योजना-जानकारों का कहना है कि अगर जमानत पर छूटे अपराधी इसी तरह खुलेआम चाकू लहराएंगे और गवाहों को धमकाएंगे, तो कानून व्यवस्था से जनता का भरोसा उठ जाएगा। ऐसे अपराधियों की जमानत रद्द करवाने और इन पर 24 घंटे नजर रखने के लिए कोई ठोस योजना बनानी होगी ताकि  शहर में जेल से जमानत पर छूटकर बाहर आ रहे बदमाश आम जनता का अमन-चैन न छीन सके। पुलिस को जमानत पर छूटे अपराधियों की दैनिक हाजिरी और सख्त डिजिटल ट्रैकिंग जैसे कड़े कदम उठाने होंगे, ताकि जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।

 नासूर बने चाकूबाज-शहर में चाकूबाज नासूर बन चुके है। चाकूबाजी की वारदातों की 1 जनवरी से 23 मई 2026 तक हुई समीक्षा में भी यह बात साफ हुई थी कि जमानत पर जेल से रिहा होने वाले आरोपियों में दोबारा अपराध करने की प्रवृत्ति परिलक्षित हुई है। जेल से छूटते ही कई बदमाशों ने फिर से चाकूबाजी की वारदात को अंजाम दिया है।

इन्होंने जेल से छूट की वारदातें
हत्या कांड में जेल से छूटे कुख्यात बदमाश शिब्बू ने 2 फरवरी को गढ़ा बेदी नगर में चौबीस घंटे के भीतर दो गोलीकांड किए।

गोहलपुर लेमा गार्डन में 24 मार्च को जमानत पर जेल से छूटे दुष्कर्म के आरोपित सलमान ने पीडि़त को केस वापिस लेने, गवाही न देने का दबाव बनाया।

 गोहलपुर थाना अंतर्गत रामनगर में छेड़छाड़ के मामले में जेल छूटे आरोपी सोहेल उर्फ बाबा ने 26 मार्च को अपने साथी के साथ मिलकर एक युवती के घर पर पथराव किया।

27 फरवरी को रांझी थाना अंतर्गत पुराना शोभापुर में जमानत पर जेल से छूटे प्रवीण रजक, शांटू यादव और अनिल सोनी ने गवाह को धमकाया बल्कि हमले की कोशिश की।

19 जनवरी को धोखाधड़ी-दुष्कर्म प्रकरण में जेल से जमानत पर बाहर निकले रेपिस्ट शांतनु घोष ने धनवंतरीनगर निवासी पीडि़ता को धमकाया।

29 मई को रांझी थाना अंतर्गत शोभापुर में रासुका से छूटे पवन रजक एवं उसके भाई प्रवीण रजक व गुर्गों के साथ मिलकर दहशतगर्दी फैलाई थी। घर व शराब दुकान में बमबाजी की थी

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